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नए श्रम कानूनों के श्रमिक-विरोधी प्रावधानों में संशोधन का आश्वासन, भारतीय मजदूर संघ की श्रम मंत्री से उच्चस्तरीय वार्ता

By Vibha Singh · September 3, 2026 at 11:01 PM
नए श्रम कानूनों के श्रमिक-विरोधी प्रावधानों में संशोधन का आश्वासन, भारतीय मजदूर संघ की श्रम मंत्री से उच्चस्तरीय वार्ता

नई दिल्ली(सत् पथ) भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने नए श्रम कानूनों में शामिल विभिन्न श्रमिक-विरोधी प्रावधानों को लेकर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की। बैठक में बीएमएस के शीर्ष नेतृत्व ने श्रमिक हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। श्रम मंत्री ने संगठन की मांगों और सुझावों पर विचार करते हुए आवश्यक सुधार एवं विधायी संशोधन किए जाने का आश्वासन दिया।

भारतीय मजदूर संघ द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 17 अगस्त 2026 को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करते हुए जिला मंत्रियों के माध्यम से प्रधानमंत्री, श्रम मंत्री एवं वित्त मंत्री को मांगों का ज्ञापन भेजा गया था। इसके बाद बीएमएस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ महत्वपूर्ण एवं विस्तृत समीक्षा बैठक की।

बैठक मुख्य रूप से औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) के विभिन्न विवादित एवं श्रमिक-विरोधी प्रावधानों पर केंद्रित रही। बीएमएस ने स्पष्ट रूप से कहा कि श्रमिकों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में भारतीय मजदूर संघ की ओर से शीर्ष नेतृत्व ने भाग लिया। प्रतिनिधिमंडल में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

बीएमएस की प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान भारतीय मजदूर संघ ने सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कानूनों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—

भविष्य निधि (ईपीएफ) की वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग।

बोनस की सीमा को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये तथा कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) की सीमा को 21,000 रुपये से बढ़ाकर 42,000 रुपये करने की मांग।

औद्योगिक श्रम संहिता, 2020 एवं स्थायी आदेशों के दायरे में आने वाले श्रमिकों की सीमा को 300 से घटाकर पुनः 100 करने की मांग, ताकि ‘हायर एंड फायर’ जैसी नीतियों पर रोक लगाई जा सके।

निश्चित अवधि रोजगार (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) को केवल स्थायी मानवशक्ति का 10 प्रतिशत तक सीमित करने तथा नियमित प्रकृति के कार्यों में स्थायी रोजगार बहाल करने की मांग।

ट्रेड यूनियनों की मान्यता के लिए आवश्यक 51 प्रतिशत सदस्यता की शर्त को अव्यावहारिक बताते हुए इसमें सुधार की मांग।

ट्रेड यूनियन पंजीकरण में ‘डीड रजिस्ट्रेशन’ का प्रावधान कानून में शामिल करने की मांग।

‘कामगार’ की परिभाषा में पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के लिए वेतन सीमा बढ़ाने तथा हड़ताल के अधिकार से संबंधित नोटिस नियमों में ढील देने पर विशेष जोर दिया गया।

भारतीय मजदूर संघ के तर्कों एवं प्रस्तुतिकरण को सुनने के बाद केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने संगठन द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने तथा श्रम संहिताओं में आवश्यक सुधार एवं विधायी संशोधन लाने का आश्वासन दिया।

वार्ता के अगले चरण में व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code) के श्रमिक-विरोधी प्रावधानों को लेकर भी बीएमएस के केंद्रीय नेतृत्व और श्रम मंत्री के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

भारतीय मजदूर संघ ने कहा है कि वह देश के करोड़ों श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की गारंटी के लिए अपना रचनात्मक एवं निर्णायक संघर्ष जारी रखेगा।

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