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भिलाई के इस्पात से समुद्र की सुरक्षा में उतरा INS Anjadip, SAIL की रक्षा क्षेत्र में बढ़ी भूमिका

By SAT PATH · September 26, 2026 at 05:26 PM
भिलाई के इस्पात से समुद्र की सुरक्षा में उतरा INS Anjadip, SAIL की रक्षा क्षेत्र में बढ़ी भूमिका

भिलाई।( सत् पथ) भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल अत्याधुनिक युद्धपोत INS Anjadip के निर्माण में भिलाई स्टील प्लांट समेत SAIL के एकीकृत इस्पात संयंत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने वाला यह युद्धपोत केवल नौसेना की ताकत का प्रतीक नहीं है, बल्कि भिलाई के इस्पात की गुणवत्ता और देश की रक्षा आत्मनिर्भरता में सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उद्योग के योगदान को भी सामने लाता है। SAIL के अनुसार, INS Anjadip सहित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा बनाए जा रहे आठ Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft (ASW-SWC) पोतों के लिए लगभग 3,500 टन विशेष ग्रेड स्टील की पूरी मात्रा SAIL ने उपलब्ध कराई। इस विशेष स्टील की आपूर्ति SAIL के भिलाई, बोकारो और राउरकेला स्टील प्लांटों से की गई। पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता का नया हथियार INS Anjadip को मुख्य रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। यह भारतीय नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने वाले ASW-SWC वर्ग का पोत है। इसे पुराने Abhay-class पोतों के स्थान पर विकसित किए जा रहे स्वदेशी युद्धपोत कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। यानी जिस युद्धपोत की जिम्मेदारी समुद्र के भीतर छिपे संभावित खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने की है, उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण विशेष इस्पात देश के ही सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों से आया है। भिलाई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि भिलाई स्टील प्लांट लंबे समय से देश के रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष गुणवत्ता वाले इस्पात की आपूर्ति में SAIL की क्षमता का हिस्सा रहा है। INS Anjadip के मामले में SAIL ने स्पष्ट किया है कि विशेष ग्रेड स्टील की आपूर्ति में भिलाई की भी भागीदारी रही है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले इस्पात के लिए उच्च गुणवत्ता, निर्धारित तकनीकी मानकों और लगातार एक समान उत्पादन क्षमता की आवश्यकता होती है। ऐसे में भिलाई जैसे एकीकृत इस्पात संयंत्र की भूमिका केवल सामान्य औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह देश की रणनीतिक जरूरतों की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन जाती है। INS Vikrant से लेकर नए नौसैनिक पोतों तक SAIL की रक्षा क्षेत्र में भूमिका INS Anjadip तक सीमित नहीं है। SAIL के अनुसार उसके भिलाई, बोकारो और राउरकेला संयंत्रों ने देश के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS Vikrant के लिए भी विशेष इस्पात उपलब्ध कराया था। वित्त वर्ष 2025-26 में SAIL ने INS Anjadip के अलावा INS Arnala, INS Udaygiri, INS Himgiri और INS Androth के लिए भी स्टील की आपूर्ति की। इस तरह भिलाई का इस्पात देश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्मों में भी अपनी जगह बना रहा है। भिलाई के लिए संदेश साफ है—फर्नेस से निकलने वाला इस्पात जब देश की समुद्री सीमा की सुरक्षा करने वाले युद्धपोत का हिस्सा बनता है, तो वह केवल स्टील नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारभूत शक्ति बन जाता है।

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